March 6, 2021

(पूरी हकीकत)

मुख्यमंत्री सुपोषण अभियानसे जिले के 6088 बच्चे कुपोषण से हुए मुक्त

राज्य में कुपोषित बच्चों की संख्या में 13.79 प्रतिशत की कमी

जांजगीर-चापा, 31 दिसंबर 2020
राज्य में कुपोषित एवं एनिमिया ग्रसित बच्चों और एनिमिक महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार लाने के उद्देश्य से 02 अक्टूबर 2019 से मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान प्रारंभ किया गया है। इस अभियान की सफलता से जांजगीर-चांपा जिले में 6088 बच्चे कुपोषण के अभिशाप से मुक्त हुए हैं वहीं छत्तीसगढ़ राज्य में अब तक 67,000 से अधिक बच्चे कुपोषण से मुक्त हुए हैं। यहां कुपोषित बच्चों की संख्या में 13.79 प्रतिशत की कमी आयी है। लाकडाउन के दौरान भी हितग्राही बच्चों और महिलाओं को सूखा राशन एवं पौष्टिक आहार वितरण किया गया। एनीमिया प्रभावितों को आयरन, फोलिक एसिड, कृमि नाशक गोलिया भी नियमित रूप से दी जा रही है।
महिला एवं बाल विकास विभाग जांजगीर-चांपा से मिली की जानकारी के अनुसार जांजगीर-चांपा जिले में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत 6088 बच्चे कुपोषण के अभिशाप से मुक्त हुए हैं। अभियान के तहत चिन्हित हितग्राहियों को निःशुल्क पौष्टिक भोजन प्रदाय किया जा रहा है। हितग्राहियों को दिए जाने वाले पौष्टिक भोजन की गुणवत्ता का विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पोषक खाद्य पदार्थों का उपयोग करने के निर्देश भी दिए गए हैं। कुपोषित और एनिमिया पीड़ित बच्चों के लिए अलग-अलग मेनू बनाया गया है। निश्चित समय-सीमा के बाद हितग्राहियों के स्वास्थ्य में हो रहे परिवर्तन की भी जानकारी संधारित की जा रही है। इस योजना का लाभ भी जिले के कुपोषित छोटे बच्चों को मिल रहा है। अभियान के तहत 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर पोषण स्तर की जांच की जाती है। गंभीर कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए जिला अस्पताल सहित विकासखंड मुख्यालयों में पोषण पुनर्वास केन्द्र की सुविधा उपलब्ध है।

लाकडाउन के दौरान हितग्राहियों के घरो में पहुंचाया गया सूखा राशन –

लाकडाउन के दौरान राज्य सरकार के निर्देशानुसार शिशुवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों को उनके घरो में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से सूखा राशन पहुंचाया गया। राशन में चांवल, गेंहू आटा, तेल, पापड़, गुड़, मिक्स दाल और सब्जी उपलब्ध करायी गयी। आंगनबाड़ी में पंजीकृत 12642 कुपोषित बच्चों को और 16700 शिशुवती महिलाओं को सूखा राशन उनके घरो में पंहुचाया गया। आगे भी यह कार्य जारी रहेगा। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा महिलाओं और बच्चों को कोरोना से बचाव के लिए भी शोसल डिस्टेंसिंग और मास्क सहित हाथों को बार-बार धोने के बारे में बताया जा रहा है।

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