July 31, 2021

(पूरी हकीकत)

आखिर गरीब ब्राम्हण के साथ हुए अन्याय,को कब तक दबाते रहेंगे जिले के जिम्मेदार अधिकारी

न्यूज़ सर्च@रैपुरा/चित्रकूट (विवेक सिंह) :-
ग्राम पंचायत रैपुरा में प्रधानमंत्री आवासों में हुए घोटालों को लगातार दबाने में लगे जिले के जिम्मेदार अफसर, मौके पर आकर जांच करने से बच रहे हैं।

आपको बता दें कि जनपद चित्रकूट के मानिकपुर विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रैपुरा भ्रष्टाचार की जड़ बन चुका है और यहां के ग्राम पंचायत मित्र से लेकर अन्य जिम्मेदार लोग मालामाल हो गए गरीबों का धन हड़प कर,परन्तु जिले के जिम्मेदार अधिकारियों के कानो में जू तक नहीं रेंगती।

ग्राम पंचायत रैपुरा में प्रधानमंत्री आवास आवास वर्ष 2017 में आए थे जो जिनके नाम पर आए थे उनको न देते हुए अपने चहेतों से मोटी रकम लेकर आवासों का लाभ पहुंचा दिया गया।
मामला यह है की रामप्रसाद पुत्र वासुदेव,और अवधेश कुमार पुत्र जगत धारी के नाम पर आवास शासन द्वारा निर्गत किए गए थे जो उनको न देकर ग्राम पंचायत मित्र और सचिव की मिलीभगत से रामप्रसाद का आवास ग्राम पंचायत मित्र के रिश्तेदार के नाम पर कर दिया गया और अवधेश का आवास भी दूसरे के नाम पर कर दिया।

जब इस मामले की जानकारी लाभार्थियों को हुई तो उन्होंने शिकायत की तो पी डी महोदय यह बोल रहे हैं कि सचिव साहब ग्राम पंचायत की खुली बैठक करवाकर आवास उनको दिए हैं तो यह बताया जाए कि जब लाभार्थी आवास की पात्रता श्रेणी में है और उसका आवास आ गया तो उसको न देकर किसी और को क्यों दिया गया।इस पर जिले के जिम्मेदार अफसर शिकायतकर्ता उमा देवी पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य मानिकपुर को अपने ऑफिस बुलवाकर यह साबित करने का प्रयास करते हैं कि आवास पात्र लोगो को ही दिया गया है तो क्या गरीब ब्राह्मण आवास योजना के लिए पात्र नहीं था जिसको शासन ने पात्र बताया था या फिर पंचायत मित्र के सगे संबंधी ही आवास योजना के पात्र हैं।

1 प्रधानमंत्री आवास की जांच अगर ग्राम पंचायत रैपुरा में हो जाए तो न जाने ऐसे कितने मामले अधिकारियों को देखने को मिल सकते हैं जो पंचायत मित्र और सचिव और प्रधान ने मिलकर गांव में भ्रष्टाचार का अड्डा बना रखा है।
शिकायतकर्ता और न्यूज सर्च की टीम लगातार इस मुद्दे को उठा रही है परन्तु आज तक कोई भी अधिकारी मौके पर जांच के लिए नहीं आए है और न ही लाभार्थियों से मिले हैं जिनके नाम पर शासन से आवास आए हैं।

आखिर कब तक गरीब ब्राह्मण के साथ अन्याय होता रहेगा और जिले के जिम्मेदार अधिकारी एय र कंडीशन चेंबर में बैठे बैठे जांच करते रहेंगे।
क्या यही शासन की मंशा है कि सरकारी पैसों का बंदरबाट करते रहो और हमको भी हिस्सा देते रहो।

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