July 30, 2021

(पूरी हकीकत)

नए कलेक्टर की नाक के नीचे स्वास्थ्य विभाग में खुलेआम भ्रष्टाचार… योग्य व्यक्ति से नहीं मिला कमीशन तो अयोग्य को दे दिया चिरायु का टेंडर

न्यूज़ सर्च@जांजगीर-चाम्पा। राज्य शासन द्वारा सभी शासकीय कार्यों के लिए अनुभवी व्यक्तिों को प्राथमिकता दी जाती है, ताकि योजना का सही ढंग से क्रियान्वयन हो सके, मगर जांजगीर चाम्पा जिले में स्वास्थ्य विभाग में चिरायु योजना के तहत वाहन किराया लेने के लिए नियमों को ताक पर रखकर निविदा निकाली गई है। यहां टूर एण्ड ट्रेवल्स की अनिवार्यता को ही समाप्त कर सप्लायर व सर्विस संचालित करने वाले फर्म को वाहन का टेण्डर जारी कर दिया गया है। इस तरह खुलेआम भ्रष्टाचार करके स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नए ईमानदार कलेक्टर की आंख में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं।

आपको बता दें कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले छोटे बच्चों को स्वास्थ्य लाभ देने के लिए कार्यक्रम प्रबंधन इकाई के अधिकारियों के दौरे के लिए 1 वाहन व विकासखण्डों में चिरायु कार्यक्रम संचालन के लिए 20 वाहनों की आवश्यकता है। सभी वाहनो के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा निर्धारित दर अनुसार ही वाहन किराये पर लिया जाना है। यहां उपरोक्त सभी वाहन निविदा के न्यूनतम दर पर नवीन कर प्रणाली जीएसटी अंतर्गत राज्य स्तर पर पंजीकृत निविदाकर्ता से नियमानुसार किराये पर ली गई। इसके तहत सीएमचओ कार्यालय द्वारा जून माह के पहले सप्ताह में टेण्डर जारी कर अन्य जिलों में निवासरत चहेतों को लाभान्वित करने के लिए पिछले वर्ष जारी नियमावली में ही परिवर्तन कर टेण्डर जारी कर दिया।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम अंतर्गत संचालित चिरायु कार्यक्रम के तहत वर्ष 2021-22 में चेहतों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से इसकी संख्या कम करते हुए 3 वाहनों की अनिवार्यता निर्धारित की गई है, ताकि आसानी से उन्हें लाभ पहुंचाया जा सके। इस बार जिस फ़र्म का काम मिला है उसका टूर एण्ड ट्रेवल्स संबंधी काम से दूर-दूर तक नाता नहीं है। फ़र्म के जीएसटी पंजीयन में ट्रेवेल्स का उल्लेख भी नहीं है। इसी तरह निविदा स्वीकृत करने के लिए कम से कम तीन फर्मों के द्वारा निविदा फ़ार्म जमा किया जाना आवश्यकय है, मगर स्वास्थ्य विभाग द्वारा दो फर्मों की ही निविदा सही पाने के बाद एक फ़र्म की निविदा स्वीकृत कर दी गई।

पांच वाहनों की बाध्यता व अनुभव की प्राथमिकता भी खत्म

पिछले कुछ वर्षों से ठेकेदार के पास कम से कम 5 वाहनों की अनिवार्यता निर्धारित की गई थी, ताकि यहां आपातकालीन स्थिति में ठेकेदार के अन्य वाहनों की सेवाएं ली जा सके, मगर वर्ष 2020 व 2021 में चेहतों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से इसकी संख्या कम करते हुए 3 वाहनों की अनिवार्यता निर्धारित की गई है, ताकि आसानी से उन्हें लाभ पहुंचाया जा सके। इसी तरह कुछ वर्षों से पूर्व जारी टेण्डर के अनुसार फ़र्म के पास शासकीय, अर्द्धशासकीय, निगम, मण्डल अंतर्गत कम से कम 3 वाहन परिचालन करने का न्यूनतम 3 वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य किया गया था। साथ ही संबंधित विभाग द्वारा जारी कार्यादेश अथवा अनुभव प्रमाण पत्र संलग्न किया जाना आवश्यक था, मगर विभाग द्वारा चहेतों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से नियमों में फेर बदल कर टेण्डर जारी कर दिया।

जानकारी देने से भी कतार रहे अधिकारी

स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराए जा रहे अधिकांश कार्य विवादों में फंसते जा रहे हैं। जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी जवाब देने से कतराने लगे हैं। वहीं कुछ जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा सप्लायर एण्ड सर्विस को टेंडर दिए जाने का निर्णय समिति के पदाधिकारियों पर थोपा जा रहा है। इस संबंध में जब सीएमएचओ डा. एसआर बंजारे के मोबाइल नंबर पर काल कर जानकारी चाही गई, तो उन्होंने काल रिसीव करना मनासिब नहीं समझा।

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