June 15, 2021

(पूरी हकीकत)

वन व‍िभाग की महिला SDO पर रेत माफियाओं ने किया हमला…एक आरक्षक घायल

न्यूज सर्च, मुरैना – मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंत हैं कि अब वह प्रशासनिक अधिकारियों तक की जान लेने से पीछे नहीं हट रहे हैं। ताजा मामला यहां वन विभाग की महिला एसडीओ पर हुए हमले का है। दबंग महिला अफसर श्रद्धा पांढरे अपनी टीम के साथ जिले में अवैध उत्खनन करने वालों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्यवाही कर रही हैं। इससे खनिज माफिया घबराए हुए हैं। इससे बचने के लिए उन्होंने महिला अधिकारी पर ही जानलेवा हमला कर दिया, जिसमें एक सिपाही भी घायल हुआ है। इतनी बड़ी वारदात हो जाने के बाद भी मौके पर कोई पुलिस बल नहीं पहुंचा और न ही पुलिस इस मामले में एफआईआर दर्ज कर कर्रवाई कर रही है।

जानकारी के मुताबिक महिला अधिकारी ने अवैध रेत से भरी 3 ट्रैक्टर ट्रॉलियों को जब्त कर राजसात की कार्यवाही के लिए वन डिपो में सुपुर्द कर दिया था। इस कड़ी कार्रवाई के बाद से खनिज माफिया महिला अधिकारी पर काफी नाराज हैं। अवैध कार्य करने के बाद भी वह उसके ऊपर हमला की योजना बना रहे थे, लेकिन महिला अधिकारी की कार्रवाई नहीं थमी। उसने देवगढ़ थाना क्षेत्र के पठानपुरा में अवैध रेत से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली को जब्त कर लिया। जब वह ट्राक्टर को लेकर देवगढ़ थाने में सुपुर्दगी करने जा रही थीं तभी लोहिक पुरा की पुलिया पर वन विभाग की टीम को रोकने के लिए रेत माफियाओं द्वारा कांटे डाल दिए गए, जिससे ट्रैक्टर ट्रॉली को कार्यवाही के लिए थाने न ले जा सकें।

उसके बाद भी जब काटों को हटाकर ट्रैक्टर ले जाने का प्रयास किया गया तो वहां काफी संख्यां में लाठी डंडे लेकर लोग पहुंच गए। जब तक मामले को समझा जाता उन्होंने दबंग महिला ऑफिसर और उनकी टीम पर हमला कर दिया। देवगढ़ थाना से एक किलोमीटर की दूरी पर 100 से अधिक माफिया फॉरेस्ट की टीम पर लाठी-डंडों से हमला कर फायरिंग करते हुए ट्रैक्टर ट्रॉली छुड़ा कर भाग गए। इस हमले में आरक्षक एसएएफ मुकेश सैन घायल हो गए। घायल को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भेजा गया है।

दो महीने में 8 बार हमला

आपको बता दें कि एसडीओ श्रद्धा पांढरे यह पहला हमला नहीं है। इससे पहले पिछले दो महीने के अंदर रेत माफियाओं द्वारा उन पर करीब 8 बार हमले किए जा चुके हैं।

हमलावरों को मिल रहा पुलिस का शह

इस पूरे मामले में एसडीओ श्रद्धा पांढरे का कहना है कि थाने से महज एक किलोमीटर की दूरी पर रेत माफियाओं ने हमला किया है। अगर थाना बल मौके पर पहुंच जाता तो शायद माफिया वन विभाग की टीम पर हमला नहीं करते। उसके बाद टीआई से एफआईआर का बोला गया तो टीआई बोले कि एसडीओ साहब से बात कर लो तब एफआईआर करूंगा जबकि मैंने कहा कि हमलावरों के वीडियो भी हमारे पास हैं। उसके बाद भी टीआई ने एक न सुनी। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस वालों को एंट्री फीस दी जाती है, जिसके कारण माफियाओं पर कार्यवाही नहीं होती है। कई बार टीआई को फोन लगाया गया था लेकिन कोई स्टाफ मौके पर नहीं पहुंचा।

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