June 21, 2021

(पूरी हकीकत)

जिला आयुर्वेद महाविद्यालय, चिकित्सालय के कोविड केयर सेंटर से सभी मरीज डिस्चार्ज

मंगलवार को अंतिम मरीज स्वस्थ होकर हुआ डिस्चार्ज, गिलोय का पौधा भेंटकर दी गई विदाई

बिलासपुर 01 जून 2021,जिला आयुर्वेद महाविद्यालय, चिकित्सालय में बनाये गये कोविड केयर सेंटर में भर्ती सभी मरीज स्वस्थ हो अपने अपने घर जा चुके हैं। मंगलवार को यहां से अंतिम मरीज को डिस्चार्ज किया गया। इस खुशी के मौके पर कोविड केयर सेंटर के स्टॉफ ने अंतिम मरीज को गिलोय का पौधा भेंटकर अस्पताल से विदा किया।

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक सकरी निवासी 47 वर्षीय कैलाश प्रजापति कोरोना संक्रमित होने पर कोविड केयर सेंटर में भर्ती हुआ था। भर्ती होने के दो दिन पहले से ही उनकी तबियत खराब थी। उसने अपना कोविड एंटिजन टेस्ट कराया था, जिसमें उसकी रिपोर्ट निगेटिव थी। डॉक्टरों ने जब उसकी जांच की तो उसकी बीमारी के लक्षण पूरे कोरोना संक्रमण के थे। उसको सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और आक्सीजन लेबल भी 77 प्रतिशत था। इसके बाद डॉक्टर की सलाह पर कैलाश जिला आयुर्वेद महाविद्यालय, चिकित्सालय में बनाए गए कोविड केयर सेंटर में भर्ती हुआ। कैलाश को कोविड के ईलाज के लिए जरूरी एलोपैथिक दवाओं के साथ-साथ आयुष काढ़ा का सेवन और फिजिकल एक्सरसाइज भी सुबह-शाम कराया जाता था।
अस्पताल में चिकित्सक एवं स्टॉफ के बेहतर देखभाल और पाजिटिव माहौल ने उसके जल्द स्वस्थ होने में मदद की। उसका ऑक्सीजन लेबल बढ़कर 96 प्रतिशत तक आ गया। पूरी तरह से स्वस्थ हो जाने के बाद कैलाश को आज अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

कैलाश ने बताया,“अस्पताल के नर्स एवं कर्मचारियों ने पारिवारिक सदस्य की तरह उसकी सेवा की। उन्होंने कहा इलाज के दौरान दी जाने वाली दवाएं तो अपना काम करता ही हैं, लेकिन अस्पताल का व्यवहार उससे दोगुना काम करता है। जिसके चलते वह जल्द स्वस्थ होकर अपने घर जा रहा है। कैलाश को अस्पताल से घर जाते समय आयुष चिकित्सक ने जरूरी व्यायाम और प्राणायाम नियमित रूप से करने की समझाईश दी। कैलाश का कहना है कि अभी तक वह प्राणायाम नहीं करता था, लेकिन अब वह नियमित रूप से प्राणायाम व व्यायाम करेगा, जिससे बिमारियों से लड़ने के लिए उसका शरीर मजबूत बन सके”।

सीएमएचओ डॉ. प्रमोद महाजन का कहना है “कोई भी बीमारी होने पर मरीज को जो दवा दी जाती है वह तभी अच्छे से काम करती है, जब मरीज के मन में जल्द स्वस्थ होने की इच्छा शक्ति होती है। साथ ही जबमरीज को अस्पताल में अच्छामाहौल और वातावरण मिले और वह ठीक होने के लिए दृढ़ संकल्पित हो तो दवा तेजी से असर दिखाती हैं और मरीज जल्द स्वस्थ होता है।”

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