September 20, 2021

(पूरी हकीकत)

कोरोना की दूसरी लहर में पूरी दुनिया में 600 व भारत में 300 से अधिक पत्रकारों की कोरोना से मौत

कई पत्रकार परिवारों के इतने बड़े बलिदान के बाद भी नहीं दिया गया फ्रंटलाइन वर्कर का दर्जा

न्यूज सर्च डेस्क नई दिल्ली – कोरोना से हुई मौतों में आम लोगों की आवाज सरकार तक पहुंचाने वाले सैकड़ों मीडिया कर्मियों के नाम भी शामिल है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर में पूरी दुनिया में जहां 600 तो वहीं भारत देश में 300 से अधिक पत्रकार कोविड की चपेट में आने से मौत का ग्रास बने हैं। इन पत्रकारों ने दिन-रात कोविड की रिपोर्टिंग की और बिना अपनी जान की परवाह किए लोगों तक पल-पल की ख़बरे पहुंचाई। कोरोना की पहली और दूसरी लहर में ग्राउंड पर जाकर रिपोर्टिंग कर रहे रिपोर्टरों और लगातार ऑफिस जा रहे पत्रकारों को न तो फ्रंट लाइन वर्कर माना गया और न ही उनको वैक्सीन में प्राथमिकता मिली।

जर्नलिस्ट Raju Narisetti के ने एक ट्वीट किया है। जिसके अनुसार भारत में अब तक कुल 300 पत्रकारों की मौत हुई है। इंस्टीट्यूट ऑफ परसेप्शन स्टडीज के रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2020 से लेकर 16 मई 2021 तक कोरोना की वजह से कुल 238 पत्रकारों की मौत हो गई। यह आकंड़े भयावह हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ परसेप्शन स्टडीज की रिपोर्ट में उन सभी पत्रकारों को शामिल किया गया है। जो फील्ड या दफ्तरों में कार्यरत थे। इनमें रिपोर्टर से लेकर स्ट्रिंगर, फ्रीलांसर, फोटो जर्नलिस्ट और सिटिजन जर्नलिस्ट तक सभी शामिल हैं।

रिपोर्ट बताती हैं कि कोरोना की पहली लहर अप्रैल से लेकर दिसंबर तक थी। इस दौरान 56 पत्रकारों ने अपनी जान गंवाई। पहली लहर के मुकाबले दुसरी लहर काफ़ी भयावह साबित हुई। 1 अप्रैल से लेकर 16 मई तक 171 पत्रकारों ने दम तोड़ दिया। शेष पत्रकारों का निधन जनवरी-अप्रैल की बीच में हुआ। मीडिया रिपोर्टस की माने तो यह आंकड़े अलग- अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खबरों, पेपर से एकत्र किए गए हैं।

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