June 22, 2021

(पूरी हकीकत)

कोरोना ड्यूटी में लगे चिरायु वाहन का बीएमओ कर रहा निजी उपयोग

बीएमओ की मनमानी से क्षेत्रवासी परेशान बिलासपुर से आना जाना करने के चलते नहीं ले पा रहे स्वास्थ सेवाओं का लाभ

न्यूज़ सर्च@बम्हनीडीह – कोरोना काल में एक तरफ भगवान का दूसरा नाम कहे जाने वाले डॉक्टर और उनका स्टॉफ जीवन मौत से संघर्ष कर लोगों की सेवा कर कोरोना संक्रमण से जूझ रहे हैं वहीं दूसरी ओर कुछ डॉक्टर ऐसे भी हैं जो इस महामारी के काल में भी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। इन्हीं डॉक्टरों में से एक डॉक्टर हैं हरीश श्रीवास। इन्हें छत्तीसगढ़ शासन ने बम्हनीडीह विकासखंड के चिकित्सा व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी है। इतनी बड़ी जिम्मेदारी होने के बाद भी बीएमओ आम जन की सेवा न कर अपनी और अपने नातेदारों की खुशियां पूरी करने में लगे हैं। वह इस संक्रमण काल में लॉकडाउन के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बिना परमीशन चिरायू वाहन से बिलासपुर और मम्हनीडीह आना जाना कर रहे हैं।

आपको बता दें कि बम्हनीडीह विकास खण्ड के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मे पदस्थ डाक्टर हरीश श्रीवास स्वास्थ्य मंत्रालय के नियमों से नहीं बल्कि अपने नियमों से सीएचसी चलाना चाहते हैं। कोई उनकी मनमानी का विरोध न करे इसके लिए उन्होंने बीपीएम को भी अपने साथ मिलाया हुआ है। बीएमओ डॉ. श्रीवास की मनमानी की बात करें तो वह राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम यानि चिरायु योजना के नियमों की धज्जिया उड़ा रहे हैं।

नियम के अनुसार इस योजना में अनुबंधित वाहन को जिले से बाहर नहीं जाना, लेकिन कोरोना काल में इमरजेंसी ड्यूटी के नाम पर इन वाहनों से बिना अतरिक्त राशि दिए 24 घंटे काम लिया जा रहा है। अनुबंधित वाहनों के मालिक भी इस संक्रमण काल में स्वास्थ विभाग का पूरा साथ दे रहे हैं और बराबर वाहन को ड्यूटी पर बिना अतरिक्त राश की मांग किए भेज रहे हैं। इस सब के बीच यहां के बीएमओ डॉ. श्रीवास चिरायु योजना में लगे वाहन का निजी उपयोग कर रहे हैं।

सूत्रों की माने तो डॉ. हरीश श्रीवास तीन दिनों से बिना अवकास लिए बिलासपुर में डटे रहे और सीएचसी की एक बार भी सुध नहीं ली। ऐसा इसलिए क्योंकि वह वहां किसी कोविड संक्रमित मरीज का इलाज करा रहे थे। इस दौरान वह बिना परमीशन न सिर्फ चिरायु वाहन से बिलासपुर गए बल्कि तीन बाद उसे फिर से बिलासपुर बुलवाया और सरकारी तेल के खर्च पर वापस बम्हनीडीह आए। हालांकि जब इस बारे बीएमओ से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कुछ भी कहने से मना किया, लेकिन चिरायु वाहन की लगबुक से साफ पता चल रहा है कि वह वाहन बिलासपुर से बम्हनीडीह बिना परमीशन आया गया।

कोविड काल में सीएचसी का बुरा हाल

बीएमओ के बिना छुट्टी गायब रहने के चलते यहां के बीपीएम भी पूरी तरह से लापरवाह हो गए। वह अस्पताल आना ही बंद कर दिए। इससे बम्हनीडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती मरीजों का इलाज भगवान भरोसे चलता रहा। मरीजों की माने तो उनकी तकलीफ जानने के लिए अस्पताल में कोई भी नहीं था। इतना ही नहीं कोरोना संक्रमित मरीज भी बिना जांच परेशान हुए और इधर उधर घूम अंजाने में संक्रमण फैलाते रहे।

शिकायत के बाद भी सीएमएचओ नहीं दे रहे ध्यान

बीएमओ की इस लापरवाही में सीएमएचओ का भी पूरा सह प्राप्त है। अस्पताल के स्टॉफ की माने तो कई बार मौखिक रूप से शिकायत करने के बाद भी सीएमएचओ बीएमओ पर न तो लगाम लगा रहे हैं और न ही इसकी जानकारी जिले के मुखिया कलेक्टर यशवंत कुमार को दे रहे हैं। यही कारण है कि कलेक्टर के सख्त लॉकडाउन का उल्लंघन कर बीएमओ चिरायु की गाड़ी लेकर बिलासपुर अपने निजी मरीज का ईलाज करने गये थे और उसे बुलवाकर वापस भी आए। इस अनैतिक कृत्य से बीएमओ ने सरकार को लगभग पैतीस सौ रूपये के डीजल का अतरिक्त भार दिया।

बीएमओ के बेबाक बयान

इस बारे में जानकारी के लिए जब बीएमओ डॉ. हरीश श्रीवास से फोन पर बात की गई तो उन्होंने अपनी गलती को स्वीकारे बिना कहा कि जो भी जानकारी चाहिए हॉस्पिटल आकर लो। आमने सामने बैठकर दोनों एक दूसरे के दर्शन कर लेंगे और इस संबंध में बात भी कर लेंगे। बीएमओ के इस बयान से साफ है कि उन्हें अपने इस कृत्य से कोई पछतावा नहीं है।

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