May 16, 2021

(पूरी हकीकत)

लॉकडाउन में नहीं मिल रही बैंक से राहत, आम आदमी से लेकर किसान तक परेशान

छोटे से लेकर बड़े व्यवसायियों के सामने किस्त न पटा पाने का मंडरा रहा संकट, केंद्र व राज्य सरकार से बैंक ईएमआई में छूट की दरकार

न्यूज़ सर्च@रायपुर. कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर राज्य में दो बार लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने के बाद सरकार अब तीसरे लॉकडाउन की ओर बढ़ रही है। सरकार के इस कदम से आम आदमी से लेकर किसान और छोटे व्यवसायी से लेकर बड़े बिजनेसमैन तक परेशान हैं। आम आदमी और किसान जहां होमलोन कृषि यंत्रों के लोन की किस्त न पटा पाने को लेकर परेशान है तो वहीं छोटे व्यापारी से लेकर बड़े बिजनेसमैन तक के सामने आर्थिक तंगी के चलते ईएमआई न पटा पाने का संकट मंडरा रहा है। लोगों का कहना है केंद्र और राज्य सरकार पिछली बार की तरह इस बार भी बैंक से ईएमआई की छूट प्रदान करें नहीं तो आदमी आर्थिक बोझ के तले दबकर आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर होगा।

इस बारे में जब आम लोगों से लेकर बड़े व्यवसायियों से बात की गई तो उनका कहना है, लोगों को कोरोना के संकट से निकालने के लिए लॉकडाउन लगाना जरूरी है, लेकिन उससे पहले सरकार को आम आदमी की तकलीफों पर भी ध्यान देना होगा। पिछली बार मार्च 2020 में जब केंद्र सरकार ने लॉकडाउन लगाया था तो लोगों को बैंक का कर्ज चुकाने में राहत प्रदान की थी। लोगों को लॉकडाउन के समय अंतराल में ईएमआई न पटाने की छूट देकर बैंक पैनाल्टी से भी राहत दी गई थी।

इस बार ऐसा कुछ भी नहीं किया जा रहा है। दो बार लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने के बाद सरकार एक बार भी तीसरी बार इसे बढ़ाने पर विचार कर रही है। इस दौरान सरकार लोगों को राशन आपूर्ति के होम डिलवरी की सुविधा तो दे रही है, लेकिन यह नहीं सोच रही की आखिर लोग बिना कमाई के राशन खरीदें कैसे? लोग होम, लोन, टू व फोर व्हीलर लोन, किसान कृषि यंत्र लोन, व्यापारी कामर्शियल वाहन व अन्य स्टार्टअप लोन की ईएमआई कैसे भरेगा।

घर परिवार बिखरने का डर

दुर्ग के देवदास साहू एक मध्यम वर्गीय परिवार से हैं। उन्होंने कड़ी मेहनत करके एजाक्स मिक्सर मशीन खरीदी। वर्तमान में उन्हें महीने 4-5 लाख रुपए महीने की किस्त और अपने स्टॉफ का वेतन देना पड़ रहा है। एक महीने से अधिक समय हो गया है लॉकडाउन के चलते काम बंद है और सभी मशीने खड़ी हैं। इससे अब साहू के सामने स्टॉफ का वेतन और वाहनों का किस्त देने का संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि यदि सरकार लॉकडाउन की अवधि को बढ़ाती है और बैंक लोन से राहत नहीं दिला रही तो उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। इससे वह और उनके परिवार सहित कई स्टॉफ का परिवार प्रभावित होगा।

ईएमआई से मिले कुछ माह की राहत

दुर्ग निवासी संदीप कुमार ने पिछले लॉडाउन में नौकरी चली जाने बैंक लोन लेकर अपना खुद का काम शुरू किया। वह अभी अपना व्यवसाय सही तरीके से शुरू भी नहीं कर पाए थे कि राज्य में लॉकडाउन लग जाने से उनका काम पूरी तरह से बंद हो गया। अब उनके सामने बैंक की ईएमआई पटाने का संकट मंडरा रहा है। यदि वह बैंक की किस्त समय पर नहीं पटा पाते तो उनका पूरा व्यवसाय प्रभावित हो जाएगा। इसलिए उन्होंने राज्य व केंद्र सरकार एक बार फिर बैंक लोन अदा करन में राहत प्रदान करने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार को कम से कम 6 माह तक बैंक की किस्त न पटाने की छूद प्रदान की जानी चाहिए। इससे वह भविष्य में सही तरीके से बैंक की किस्त भी अदा कर पाएगा और उसका व्यवसाय भी प्रभावित नहीं होगा।

किसान आत्महत्या के लिए होगा मजबूर

रायपुर जिले के एक किसान राजेश कुमार ने बताया कि उन्होंने अच्छी खेती करने के उद्देश्य से बैंक लोन लेकर ट्रैक्टर और कुछ अन्य कृषि यंत्र लिए थे। इस बार फसल भी ठीक हुई, लेकिन लॉकडाउन के चलते उसे बेचने के लिए सही बाजार नहीं मिल पा रहा है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और हालत यह है कि वह बैंक का लोन भी नहीं पटा पाएंगे। उन्होंने सरकार से लोन की ईएमआई पटाने में छूट दिए जाने की मांग की है। ऐसा न हुआ तो किसान फिर से आत्महत्या के लिए मजबूर होगा।

होम लोन पटाने का संकट

साल 2020 में कोरोना काल के दौरान किराय के मकान का दर्द झेलने के बाद रायपुर के शिक्षक मुरली मनोहर शर्मा ने अपना खुद का एक छोटा सा मकान लिया। उन्होंने उसकी किस्त अपनी आमदनी के मुताबिक बनवाई। उनका परिवार नए मकान में शिफ्ट तो हो गया है, लेकिन फिर से लॉकडाउन लगने से उनकी वेतन समय पर नहीं मिल पा रही है। इतना ही नहीं पत्नी के बीमार होने उनके इलाज में जमा पूंजी भी खर्च हो गई। अब उनके सामने होमलोन की ईएमआई पटाने का संकट खड़ा हो रहा है। उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि इसमें उन्हें राहत प्रदान की जाए।

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