February 25, 2021

(पूरी हकीकत)

खनिज विभाग की सह पर खदानों से निकल रहा बिना रॉयल्टी माल

News [email protected]दुर्ग- जिले में खनिज विभाग अंधेरे नगरी चौपट राजा टके सेर भाजी टके सेर खा जा वाली तर्ज पर चल रहा है। हालात ये की खनिज अधिकारी कोरोना के भय से अपने एसी चैंबर से बाहर नहीं निकल रहे और क्रेशर संचालक खुलेआम बिना रॉयल्टी के माल बेच कर शासन को करोड़ों रुपए की चपत लगा रहे हैं। कुछ क्रेशर संचालक तो यह भी कह रहे हैं कि उनकी जिम्मेदार अधिकारियों से सेटिंग है तो कुछ यह कह रहे हैं कि यदि सभी को रायल्टी पर्ची देंगे तो वो कमाएंगे कैसे। न्यूज़ सर्च की टीम ने इस सच्चाई को जानने के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग कर इस पूरी सच्चाई को अपने कैमरे में कैद किया।न्यूज़ सर्च की टीम रायल्टी चोरी की पड़ताल करने के लिए पाटन क्षेत्र की चुनकट्टा, पतेरा, सैलून, मुड़पार, पतोरा, पेडरी में संचालित पत्थर खदान का दौरा करने पहुंची। देखने में आया कि यहां नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। यहां खुलेआम बिना रॉयल्टी पर्ची के गिट्टी बेची जा रही है। जब इस बारे में खदान की देखरेख करने वाले से बात की गई तो उन्होंने कहा की रॉयल्टी देंगे तो कमाएंगे कैसे। टीम जब ढौर और सैलूद में संचालित सोमा सिंह पति संजय सिंह दुर्ग के खदान पहुंची तो यहां कहीं पौधे नहीं लगाए गए थे। जो भी गाड़ियां गिट्टी लेकर जा रही थीं, उन्हें क्रशर संचालक रॉयल्टी पर्ची नहीं दे रहा था। ट्रैक्टर चालक जोगिंदर सिंह से पूछने पर उसने बताया कि उन्हें बिना रॉयल्टी पर्ची के सस्ते रेत में गिट्टी दे दी जाती है तो वो उसे दूसरे बेचकर अधिक मुनाफा कमा लेते हैं। जब क्रशर की देखरेख करने वाले से पूछा गया तो उसने बताया कि बड़ी गाड़ियों को ही रॉयल्टी देते हैं छोटी गाड़ी और ट्रैक्टर को रॉयल्टी देंगे तो कमाएंगे क्या, फिर ऊपर भी तो देना पड़ता है।

सुरक्षा के उपाय ताक पर

क्रेशर के लिए पत्थर निकलने के लिए सैकड़ों फिट गहरी खोदाई तो की गई, लेकिन जानवर और इशान को उसमें गिरने से बचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए। हद तो यह है कि खदान को एक निश्चित गहराई तक ही खोदा जा सकता है, लेकिन अधिकारियों और संचालकों का कहना है कि जब तक पत्थर निकलता है तब तक खोदा जाता है।

खदान क्षेत्र में नहीं हो रहा पौधरोपण
पर्यावरण नियमों की बात करें तो खदान परिसर में पौधरोपण भी करना जरूरी है। सच्चाई की बात करें तो किसी भी खदान में पौधरोपण नहीं किया जाता। पूछने पर खदान संचालक कहते हैं कि पौधरोपण तो किया जाता है, लेकिन उन्हें जानवर चर जाते हैं।

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