February 27, 2021

(पूरी हकीकत)

ये हैं हमारे कोरोना वॉरियर्स, जिन्हें फर्ज के लिए अपनी चिंता न परिवार की फिक्र

विश्व स्टाफ नर्स दिवस पर विशेष 

न्यूज़ सर्च@रायपुर. कोरोना संक्रमितों के बेहतर इलाज के जिस एम्स ने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है, उसी एम्स के कोरोना वॉरियर्स अपने परिवार से पहले अपने फर्ज को मानते हैं। उनकी इसी समर्पित कार्यशैली के चलते बिना किसी हानि के कोवीड-19 संक्रमित का सफल इलाज हो पा रहा है। इस कार्य में एहतियात बरतने के बाद भी नर्सेस स्टॉफ को कोरोना संक्रमित होने का सबसे अधिक खतरा है। अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स खुद की और परिवार की फिक्र किए बिना शिद्दत से अपना फर्ज निभा रहे हैं। यहां के नर्सेस स्टॉफ से जब उनके कार्य के बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौर में अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए पूरी लगन से काम कर रहे हैं। खतरा भी है, लेकिन कोरोना का खत्मा भी बेहद जरूरी है। इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए घर से भी दूर रहते हैं।

फर्ज के लिए 21 दिनों तक घर से दूर

मेरे परिवार में माता-पिता एवं भाई हैं। ऐसे समय में परिवार से अधिक अपने फर्ज को महत्व दिया। कोरोना की जंग को जीतने के लिए 15 से 21 अप्रैल तक एम्स में कोरोना पेशेंट के इलाज लगी रही। इस दौरान 21 दिन कोरोना वार्ड में ड्यूटी करना पड़ा। हॉस्पिटल में ही आठ रात गुजारी। पेशेंट के इलाज के बाद 14 दिन के क्वारेंटाइन पीरियड में रही। क्वारेंटाइन पीरियड में शांत एवं एकाग्रचित्त मन से अपने आपको आगे की ओर केन्द्रित किया है। घरवाले शुरुआती दौर में चिंतित थे किन्तु मैंने अपने फर्ज को सामने रखते हुए उन्हें समझाया। सेफ्टी के लिए पीपीई किट का उपयोग एवं समय समय पर हाथों को सेनेटाइज किया। इसमें शारीरिक रूप से बहुत तकलीफ भी होती है। किट पहने के बाद पसीना काफी आता है। कोरोना का भय भी सता रहा था, लेकिन सुरक्षा एवं सावधानी से काम करते हुये हमने अपने आप पर नियंत्रण किया। मरीज को डिस्चार्ज करते समय उनका ताली बजाकर हौसला बढ़ाते हुए उनकी विदाई करने पर कई बार मरीज भावुक हो जाते थे और यह हमें भी भावुक कर देता था।
– पूजा गहलावत, नर्सिंग अधिकारी, एम्स

फर्ज के बाद अब सोशल डिस्टेंसिंग

परिवार में पत्नी व ढाई साल का बेटा है। उसे देखे बिना कोई दिन नहीं जाता था। 15 से 21 अप्रैल तक सात दिन कोविड वार्ड में ड्यूटी की और फिर 14 दिन के इन्स्टीट्यूशनल क्वारेंटाइन में थे। इस दौरान 21 दिन बेटे से दूर रहना मेरे लिए काफी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन जिस तरह अपने परिवार को फर्ज के खातिर समझाया उसी तरह खुद को भी समझाता रहा। क्वारेंटाइन पीरियड पूरा होने के पश्चात 9 मई से पुनः कार्य के लिए उपस्थित हो चुका हूं। परिवार वालों को मेरी कोरोना वार्ड मे ड्यूटी लगने की जानकारी मिलने पर उन्हें शुरुआती तौर पर चिंता हुई किन्तु मेरे समझाने पर आगे आते हुये मेरा सहयोग किया। फिलहाल कार्य पर लौटने पर मुख्य तौर पर सोशल डिस्टेन्सिंग मेंटेन कर रहा हूँ।

–  कनगराज एस, असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट

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