April 17, 2021

(पूरी हकीकत)

टीबी की बीमारी से ठीक होकर अब लोगों कर रहे जागरूक

टीबी चैंपियन ने खुद से गाना और शॉर्टफिल्म बनाकर यूट्यूब पर किया अपलोड,लोगों को प्रोजेक्टर के माध्यम से दिखाकर कर रहे जागरूक

बिलासपुर, 14 मार्च, 2021, टीबी यानि क्षयरोग यह एक ऐसी गंभीर, संक्रामक और बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी जो मुख्‍य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है और जानलेवा हो सकती है। वर्तमान में यह रोग लाइलाज नहीं रहा है और इसे लेकर सरकार टीबी चैम्पियंस के माध्यम से गांव-गांव में जागरूकता फैलाने का काम भी कर रही है।

आज हम एक ऐसे टीबी चैंपियंस की बात कर रहे हैं, जिसने टीबी होने के बादजीने की आस ही खो दी थी, लेकिन घर वालों की हिम्मत और नियमित रूप से जांच और दवा के सेवन से आज वह पूरी तरह से ठीक है। और ठीक होने बाद वह टीबी चैंपियंस बना और आज खुद का उदाहरण देकर टीबी से ग्रसित लोगों को सही दवा सेवन और जांच के लिए राजी कर उनकी जान बचा रहा है। लोगों में टीबी के प्रति तेजी से जागरूकता लाई जा सके, इसके लिए उसने खुद से एक शॉर्ट फिल्म और गाना बनाया और उसे यूट्यूब में अपलोड भी कर दिया। इसके बाद वह प्रोजेक्टर के माध्यम से स्कूल, पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को गाना और शॉर्ट फिल्म दिखाकर जागरूक कर रहा है।

हम जिस टीबी चैंपियंस की बातकर रहे हैं वह बिलासपुर जिले के सीपत क्षेत्र केरहने वाले कलागिर गोस्वामीहै। कलागिर गोस्वामी नाम के इस युवक के कार्यों की जितनी भी तारीफ की जाए वह कम है। गोस्वामी ने बताया,“वह साल 2002 से लोगों को टीबी की दवा खिलाने का कार्य करता रहा। इस दौरान 2004 में उसे एक दिन तेज बुखार आया। इलाज कराने से बुखार तो ठीक हुआ, लेकिन उसके बाद खांसी और बुखार की शिकायत फिर से बढ़ गई। समय पर टीबी का इलाज न मिलने से वह काफी कमजोर हो गया और उसे लाठी का सहारा लेकर चलना पड़ने लगा। इसी दौरान उसने सीपत सीएचसी में अपनी बलगम जांच कराई तो उसे पता चला कि उसे टीबी की बीमारी हो गयी है। गोस्वामी ने सोचा कि अब उसकी जिंदगी खत्म हो गई और वह बचेगा नहीं। इसके बाद उसकी पत्नी और घर वालों ने उसे हिम्मत दी। डॉक्टर के बताए अनुसार उसने पूरी सावधानी बरतते हुए नियमित रूप से दवा का सेवन किया और हर दो माह में डॉक्टर से चेकअप कराया। छह माह में ही गोस्वामी पूरी तरह से ठीक हो गया और जो गांव वाले उससे दूर भागते थे वह आज फिर से उससे अच्छा व्यवहार करने लगे हैं।

टीबी चैम्पियन बन लोगों को कर रहेजागरूक

कलागिर गोस्वामी का कहना है,“टीबी से ठीक होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उसे टीबी चैम्पियन बनने के लिए बुलाया तो वह तुरंत राजी हो गया। गोस्वामी ने यह जीवन में ठान लिया था कि टीबी से ग्रसित होने पर जो तकलीफ उसने झेली है वह दूसरा कोई भी न झेले। इसके बाद गोस्वामी ने बिलासपुर और दिल्ली में एक-एक सप्ताह की ट्रेनिंग ली। इसके बाद वह सीएचसी से टीबी पीड़ितों का नाम पता लेता और टीबी बीमारी होने पर जिंदगी से निराश हो चुके लोगों को जागरूक कर जीवन की नई राह दिखाने का काम कर रहा है। लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करने के लिए वह प्रोजेक्टर के माध्यम से उन्हें खुद की बनाई शॉर्ट फिल्म और गाने भी दिखाता है।

लोगों को प्राथमिक इलाज देने को शुरू की प्रैक्टिस

पेशे से राजमिस्त्री कलागिर गोस्वामी काफी गरीब परिवार से है। 12वीं बायो से पास करने के बाद उसने घर चलाने के लिए राजमिस्त्री का काम शुरू किया। लेकिन जब वह टीबी की बीमारी से ठीक हुआ और पाया कि लोग सही प्राथमिक लाज न मिलने से बड़ी बीमारी से ग्रसित हो जा रहे हैं तो उसने फार्मेसी की पढ़ाई शुरू की और गांव में जनरल प्रैक्टिस शुरू कर लोगों का प्राथमिक इलाज करता और उन्हें सही इलाज के लिए सीएचसी, पीएचसी या जिला अस्पातल और सिम्स भेजता है।

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