March 1, 2021

(पूरी हकीकत)

न बैंडबाजा न बाराती, यूं ही बन गए जमाई राजा, लाॅकडाउन में सादगी के साथ ही दूल्हा- दुल्हन ने लिये सात फेरे

लाकडाउन में दिखावे से दूर एक भाई ने अपनी बहन की कराई शादी

जांजगीर-चांपा :- कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देशभर में लॉकडाउन लागू किया गया है. इस लॉकडाउन के चलते सभी लोग अपने घरों में हैं. अक्षय तृतीया के मुहूर्त पर बहुत अधिक शादियां होती हैं. लेकिन कोरोना के कहर के चलते हजारों की तादाद में शादियां स्थगित हुई हैं.

लेकिन इसी बीच ऐसी ही एक अनोखी शादी हुई है, जिसमें लाॅकडाउन के बीच ही सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए दूल्हा-दुल्हन एक साथ पवित्र बंधन में बंध गये।

दरअसल, यह मामला बम्हनीडीह ब्लॉक के ग्राम पंचायत बिर्रा का है, यहां लॉकडाउन के बीच दुल्हा सज धज कर पूरे रीति रिवाज के साथ दुल्हन को लेने आ गये।

ऐसी महामारी के हालातों में जनपद पंचायत बम्हनीडीह से महज कुछ ही दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत बिर्रा में आज एक ऐसा विवाह सम्पन्न हुआ जिसमें ना शहनाई बजी, ना वर घोड़े पर सवार हुआ, लेकिन फिर भी सांस्कृतिक विधिवत तरीके से विवाह की पूरी रस्में संपन्न हुआ।

सोशल डिस्टेंस का रखा गया ध्यान
वैवाहिक जोड़े नम्रता – दिवाकर और उसके पूरे परिवार पूरी तरह सरकार के तमाम निर्देशों के साथ ही साथ मास्क लगाकर सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन करते हुए विवाह संपन्न हुआ, वहीं दुल्हन के भाई युवा पत्रकार जितेन्द्र तिवारी ने अपने नम आखो से बहन का विदाई किया।।

दुल्ह-दुल्हन को याद रहेगी ऐसी शादी

कोरोना के संक्रमण में 60  दिन से चल रहे लॉकडाउन से यूं तो हर कोई त्रस्त है। मगर इस लॉकडाउन के तमाम अच्छे पहलू भी रहे। भीड़भाड़ वाले आयोजन टल गए। तमाम शादियां भी टल गईं। लॉकडाउन में जिनकी शादी हो गई, वह बेहद कम खर्च में निपटीं। इस समय वैवाहिक बंधन में बंधने वाले वर-वधुओं केे लॉकडाउन के समय होने वाली अपनी शादी हमेशा याद रहेगी। इसे कोई भुला नहीं सकेगा।

दिखावे से दूर कम खर्च में निपट गयी शादी

आमतौर पर शादी के नाम पर निमंत्रण पत्र छपवाने से लेकर वर इच्छा, जनेऊ, तिलक, महिला संगीत, बरात ले जाना, शानदार दावत, बैंडबाजा, सात फेरे लेेने सरीखी रस्में शामिल होती हैं। सामाजिक मान प्रतिष्ठा की खातिर प्रत्येक शादी में लाखों रुपये न चाहकर भी खर्च करने पड़ते हैं। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन में जिनकी शादियां हो रही हैं, उनका खर्च पहले की तुलना में 10 फीसदी भी नहीं हो रहा। गरीब और मध्य वर्गीय परिवारों के लिए लॉकडाउन में शादियां वरदान साबित हुई हैं। ऐसे परिवारों में बेटे या बेटी की शादी बिना फिजूल खर्च किए ही पांच या 10 हजार में निपट गई। चार या पांच बराती ही जाकर बेटे को ब्याह लाए। पंडित जी या काजी का इंतजाम वहीं से हो गया, जिस जगह से शादी होनी थी। इन परिवारों को यह तो मलाल है कि उनकी शादी में बैंडबाजा नहीं बजा। न ही वह अपने दोस्तों को शादी में बुला पाए। मनमाफिक दावत नहीं कर पाए। मगर, ऐसे परिवार संतुष्ट भी हैं कि उनका इतना सारा पैसा बच गया। कम पैसे में ही गृहस्थी बस गई। यहां तक कि रसूखदारों की शादियां भी कम खर्च में निपट गईं। अब ये सब बहुत खुश हैं।

लड़की का भाई जितेन्द्र तिवारी का कहना है कि वह सबकी शादी में बैंड बाजा बाजे के साथ शादी होते हुए देखे भी हैं और कराएं भी हैं लेकिन अपनी बहन के शादी में बैंड बाजा नहीं बजवा पाए। उनकी शादी यादगार बन गया।
भाई ने बताया कि यदि लॉक डाउन नहीं लगा होता तो बेटी की शादी करने में लगभग तीन से चार लाख रुपया खपत हो जाता ।वही लॉक डाउन के दौरान शादी होने से उनको कम खर्चे में ही पूरा का पूरा शादी निपट जाएगा। लाक डाउन में ही शादी होने से उनको किसी से कर्ज लेने की आवश्यकता पड़ा और ना ही किसी की मदद की आवश्यकता पड़ा उनके पास जितना भी पैसा था उनसे वे बड़े ही धूमधाम से शादी कर लिया।

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