April 18, 2021

(पूरी हकीकत)

झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले गरीब बच्चों के बीच शिक्षा की अलख जगा रही आंचल

22 वर्षीय युवती के जज्बे को देख सभी हैं दंग, अकेले 50 से अधिक बच्चों को दे रही हैं निशुल्क शिक्षा

बिलासपुर, 7 मार्च, 2021-केंद्र व राज्य सरकार की तमाम कोशिशों के बाद आज भी शिक्षा और स्वास्थ्य सम्बन्धी सेवायें गरीबों तक पूरी तरह से नहीं पहुंच पारहींहैं । इसलिए इन सेवाओं को घर-घर तक पहुंचाने के लिए सरकार खुद भी अलग-अलग एनजीओ व समाजसेवी संस्थाएं की मदद लेतीहैं, लेकिन बिलासपुर की 22 वर्षीय युवती आंचल तेजाणी का जज्बा सबसे अलग ही है। आंचल मई 2019 से “कदम ए स्टेप फॉरवर्ड” नामक एक एनजीओ तो चलाती हैं, लेकिन उनकी खास बात यह है कि उनका सपना झुग्गी झोपड़ी बस्तियों में रहने वाले हर बच्चे को शिक्षित करना है। यही कारण है कि आंचल अकेले ही यह काम करने निकल पड़ीं हैं और आज वह 50 से अधिक बच्चों को लगातार वहां जाकर शिक्षा दे रही हैं।

आंचल का समर्पण देखकर लोग भी उनके जज्बे को सलाम कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि उनका यह कदम वाकई सभी के लिए प्रेरणादायक है। लोगों का कहना है कि आज भी शिक्षा की रूचि रखने वाले कई वर्ग आर्थिक, शारीरिक अक्षमताओं सहित अन्य कारणों से स्कूल नहीं जा पाते हैं। ऐसे में आंचल ने जो कदम बढ़ाया है यह उनके न पढ़ पाने वाले गरीब बच्चों के लिए मील का पत्थर हैं। आज करीबन 50 बच्चों को नियमित शिक्षा देने का प्रयास निरंतर कर रही हैं।

बिलासपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता आंचल तेजाणी कहती हैं, ”यह समस्या भारत की की एक बड़ी समस्या है। भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक माना जाता है। यदि वह अपने जैसे और भी लोगों को गरीब बच्चों को शिक्षा देने के लिए प्रेरित कर पाईं तो एक दिन ऐसा आएगा कि भारत का हर वर्ग पढ़ालिखा होगा और इसी की बदौलत भारत एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में खड़ा होगा।‘’

ढाई सालों से लगातार दृढ़ संकल्प होकर कर रहीं कार्य

आंचल का कहना है, ‘’ उन्हें बचपन से ही दूसरों की मदद करने की आदत है। धीरे-धीरे वह बड़ी हुईं और उनसे जो भी हो सका वह समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करती गईं। ढाई साल पहले उन्होंने अपने काम को एक नई दिशा देने को सोचा और मई2019 में “कदम: ए स्टेप फॉरवर्ड” नामक एनजीओ की स्थापना की। तब से लेकर आज तक वह छत्तीसगढ़ के स्लम बच्चों को शिक्षित करने के रास्ते में आगे ही बढ़ती जा रही हैं। आंचल का कहना है कि कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन हो जाने से वह ढाई सालों में बीच के 1साल तक बच्चों की क्लास नहीं ले पाईं, लेकिन अब वह फिर से नियमित कक्षाएं लेकर बच्चों को पढ़ा रही हैं।आंचल के इस साहसिक कदम की थाप सरकार तक भी पहुंच चुकी है और इसके लिए बिलासपुर पुलिस बल और स्थानीय सरकार द्वारा कोरोना योद्धा के रूप में उन्हें सम्मानित भी किया गया है। आंचल का कहना है कि आगे यदि उन्हें सरकार से सही मदद मिली तो वह झुग्गी झोपड़ी में पढ़ने वाले बच्चों को और भी काफी कुछ करेंगी।‘’

You cannot copy content of this page

en_USEnglish
Open chat
विज्ञापन के लिए इस नंबर पर संपर्क करें