March 2, 2021

(पूरी हकीकत)

श्रमिको के वेतन-भत्तों में कोई वृद्धि किए घंटे 8 से 12 घण्टा काम करने आदेश उद्योगपतियो के पक्ष में – इंटक

गृहमंत्रालय के हवाला देकर प्रशासन ने भूखहड़ताल – धरना करने रोका – इंटक

देश के सभी नागरिकों को 7500 रुपये कोरोना राहत पैकेज दे – इंटक 

प्रदेश भर के इंटक पदाधिकारीयो ने ज्ञापन सौप केंद्र सरकार के प्रति व्यक्त किये आक्रोश – इंटक 



जांजगीर चाम्पा – भारतीय राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (INTUC) जिलाध्यक्ष मारूति उपाध्याय ने प्रेस को विज्ञप्ति जारी कर कहा कि श्रम कानून के बदलाव, कोयला खदानों,शासकीय उपक्रमो,उद्योगों के निजीकरण के विरोध लॉक डाउन में बंद उद्योगों उपक्रमो के श्रमिकों कर्मचारियों को वेतन देने एवं देश के सभी जरूरत मन्दो को सीधे 7500 रुपये कोरोना राहत पैकेज देने की मांग जिला प्रशासन के मध्यम से महामहिम राष्ट्रपति,मुख्य न्याय सुप्रिम,महामहिम राज्यपाल छः ग,मुख्यमंत्री छः ग के नाम ज्ञापन सौपे !
इंटक नेता ने कहा कि विगत 65 दिनों से देश के रफ़्तार प्रगति कोरोना कोविन्ड 19 के वजह से रुक गई है 20 मार्च को प्रधानमंत्री द्वारा जनता कर्फ्यू की घोषणा फिर सम्पूर्ण लॉक डाउन और आज लॉक डाउन के चौथे चरण चल रहा है जिसके बाद भी लगातार मरीज बढ़ रहे हैं !
कोरोना संकट से अर्थव्यवस्था को उबारने के नाम पर मोदी सरकार देश की जनता पर अपना कारपोरेटपरस्त और सांप्रदायिक राजनीतिक एजेंडा थोपने पर आमादा है। कई श्रम कानूनों को दरकिनार करके मात्र प्रशासनिक आदेशों से वह ऐसे प्रावधान लागू कर रही है, जो देश को फिर से दास युग में धकेल देगी। वेतन और भत्तों में कोई वृद्धि किए बिना काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 किया जाना उद्योगपतियो पूंजीपतियों को फायदा पहुचना इसकी एक मिसाल है।
केंद्र सरकार के बहुप्रचारित 20 लाख करोड़ के पैकेज के जरिए एक ओर तो कारपोरेट लूट के लिए बैंकों के दरवाजों को और खोल दिया है, वहीं दूसरी और आत्मनिर्भरता की लफफाजी की आड़ में देश की सार्वजनिक संपत्ति को बेचने का अभियान तेज कर दिया है। रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र को विदेशी निवेश के लिए खोलने और निजीकरण की नीतियों से देश की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है और राष्ट्रवाद की लफ्फाजी करने वालों का चेहरा बेनकाब हो गया है।
20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज देश और जनता के सामने खड़ी तात्कालिक चुनौती का समाधान नहीं करता प्रधानमंत्री असंगठित क्षेत्र के प्रवासी मजदूरों को हजारों किलोमीटर पैदल चलने व भूखे मरने के लिए छोड़ दिया गया है। कोरोना संकट के कारण 20 करोड़ लोग बेरोजगार हो चुके हैं और 50 करोड़ लोग भुखमरी और गरीबी की रेखा के नीचे चले गए हैं। देश की जीडीपी के ऋणात्मक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके बावजूद यह पैकेज ना तो प्रवासी मजदूरों को न ही असंगठित मजदूरों, उद्योगों,उपक्रमों में, खनन छेत्रो में कार्यरत मजदूरों को राहत देता है, ना खेती-किसानी की समस्या को कम करता है न किसानों को राहत देता है और ना ही रोजगार खो चुके लोगों की कोई चिंता करता है, जबकि लोगों को पोषण आहार उपलब्ध करवाना और उनकी आजीविका की रक्षा करना और कोरोना संकट के कारण लोगों की रोजी-रोटी को हुए नुकसान की भरपाई करना केंद्र सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए था  सरकार ने केंद्रीय सरकार व सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतन-भत्तों पर हमला करना शुरू कर दिया है और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को मरने के लिए छोड़ दिया है।

जिसको लेकर आज दिनांक 22 मई को हमारे संघटन को 24 घण्टे की भूखहड़ताल करने के निर्णय लिए थे जिस पर प्रशासन ने केंद्रीय गृहमंत्रालय के हवाला देकर भूखहड़ताल-धरना करने नही दीया ज्ञापन के मध्यम से निम्नांकित मांग किये जिसमे मुख्यतः पूर्व में लॉक डाउन के समय बन्द उद्योगों उपक्रमो कलकारखानों में कार्यरत श्रमिको कर्मचारियों की वेतन नही काटने की बात कहा गया था जिस पर 100 प्रतिषत अमल की जाए नए कानून को रद्द करने,प्रधानमंत्री द्वारा 20 लाख करोड़ राहत पैकेज की घोषणा किये पर किसी भी जरूरत मन्दो को सीधे फायदा नही मिलेगा उनको प्रसाशनिक अधिकारीयो के ऑफिसों की चक्कर काटना पड़ेगा जिसके हम विरोध करते हैं देश के 135 करोड़ जनता की बैंक एकाउंट में सीधे 7500 प्रतिमाह कोरोना राहत पैकेज हमारे नेता शिर्ष नेतृत्व श्रीमती सोनिया गांधी जी श्री चंद्रशेखर दुबे जी प्रदेशाध्यक्ष इंटक दीपक दुबे के मांग अनुरूप अतिशीघ्र प्रदान करने,केंद्र सरकार द्वारा वेतन भत्ता को बढ़ाए बिना कार्य के समय 8 घण्टा से 12 घण्टा कर पुनः देश को दास युग मे ले जा रहे हैं जिसके हम विरोध करते इस कानून को छः ग राज्य में लागू होने नही देंगे,दिसम्बर में ही इस महामारी की सूचना विश्व स्वास्थ्य संगठन ने देश को दे दिया था फिर जनवरी में भी आगाह किया गया उसके बाद भी आंतरराष्ट्रीय हवाई उड़ान नही रोका गया न ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इसपर ध्यान दिए न ही केंद्रीय गृह मंत्रालय इस पर कोई कार्यवाही की जो घूमने के वीजा पर आए थे वह देश मे धर्म प्रचार करते रहे कोरोना को फैलाते रहे जिस वजह से आज देश इस विकट परिस्थितियों से गुजर रहा है इस पर तत्काल एक सुप्रीम कोर्ट जांच दल गठित कर जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्यवाही हो,देश के सभी भी बैंक बिना अधिक कागजी कार्यवाही किये  गरीब मध्यमवर्गीय परिवार को 10 हजार से 1 लाख नए रोजगार करने के लिए लोन दे,देश मे अब दाम निर्धारण कानून बनाये जाए जो समान एक रुपये में बनता है आज वह मार्केट में 10 रुपये बिकता हैं इस पर कानून बने कोई भी समान लागत मूल्य से 10 प्रतिषत अधिक न मिले,सार्वजनिक छेत्रो में सरकारी उपक्रमो उद्योगों में कार्यरत श्रमिको मजदूरों की पीएफ पर कठौती की जा रही है जिस पर रोक लगाई जाए,यह कि श्रम कानून से लगातार उद्योगपति पूंजीपतियों द्वारा खेलवाड़ किया जाता रहा हैं कोई भी प्रतिष्ठानों में 100 प्रतिषत श्रमिको की उपस्थिति नही बताई जाती जिसके वजह से न ही उनको पीएफ और ईएसआई के लाभ मिलता है न  शासन के योजओ की लाभ मिल पाता हैं इस पर एक जांच दल बनाई जाए जो हमारे संघठन के पदाधिकारियों के साथ जांच कर कार्यरत श्रमिको को लाभ दिलाने की मांग किये ज्ञापन सौपने में युवा इंटक प्रदेश उपाध्यक्ष साकेत जांगड़े,,सचिव पूरन किशोर वैष्णव, अध्यक्ष संजय रत्नाकर, ग्रामीण युवा अध्यक्ष नागेंद्र समले सहित इंटक पदाधिकारी उपस्थित थे।

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