March 7, 2021

(पूरी हकीकत)

आदिवासियों के स्वास्थ्य से किया जा रहा खिलवाड़… हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

न्यूज सर्च रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वपूर्ण योजना ग्रामीण मोबाइल मेडिकल यूनिट (आरएमएमयू) में आर्थिक अनियमितिता और स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर आदिवासियों की जान से खिलवाड़ करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हालत यह है कि मामले की जांच रिपोर्ट आने के बाद भी विभाग द्वारा कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए ठेका कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही राज्य शासन को तीन सप्ताह में विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने कहा है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की बेंच में हुई।

संजय तिवारी ने अधिवक्ता हरि अग्रवाल के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। इसमें बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के अनुसूचित क्षेत्र के 16 जिलों के लिए आरएमएमयू योजना बनाई। इसके लिए टेंडर जारी किया। जिससे अनुसूचित क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दरवाजे पर मिल सके। विभिन्न नियम शर्तों वाले इस टेंडर को जय अंबे इमरजेंसी सर्विस लिमिटेड कंसोटियम सम्मान फाउंडेशन ने प्राप्त किया।

शासन ने ठेका में शर्त रखी थी कि हर एंबुलेंस में एमबीबीएस डॉक्टर, नर्सिंग टीम के साथ हो। सभी एंबुलेंस 2017 से पुरानी नहीं होनी चाहिए, 30 मरीजों की जांच प्रति दिन करनी होगी। इन शर्तों को मानते हुए ठेका कंपनी ने 2018 में 5 साल के लिए एग्रीमेंट किया। कुछ दिनों बाद याचिकाकर्ता ने पाया कि ठेका कंपनी अनियमितता कर रही है। जिन गाड़ियों को चलना बता रहे हैं वे खड़ी रहती हैं। इलाज नहीं हो रहा, डॉक्टर, उपकरण की कमी है, पुरानी एंबुलेंस चलाए जा रही हैं, शासन का उद्देश्य पूरा नहीं किया जा रहा है। इसकी शिकायत उन्होंने की तो नोडल अधिकारी ने जांच कर 30 जुलाई 2020 को अपनी रिपोर्ट संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं को भेजी। इसमें साफ है कि ठेका कंपनी सेवा शर्तों का इरादतन तरीके से उल्लंघन कर रही है। जहां एमबीबीएस डॉक्टर रखने थे वहां होम्योपैथी और डेंटल डॉक्टर रखे गए हैं। जिनका नाम दिया गया है वे भी गलत हैं। यह आदिवासियों के जीवन के साथ खिलवाड़ है।

इसके लिए दो माह मई और जून 2020 का सर्वे भी किया गया। इसमें पाया गया कि कंपनी ने 787 दिन का बिल पेश किया है जबकि जीपीएस लोकेशन में मिला कि वाहन 319 दिन ही वाहन चले। 30 मरीज देखना था तो सितंबर 2019 से जून 2020 तक 97 मरीज प्रतिदिन की ओपीडी दिखाई। जांच में मिला कि प्रतिदिन 15 मरीज ही इलाज कराने आए, ठेका कंपनी ने ओवर रिपोर्ट की है।

हाईकोर्ट से इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करवाने की मांग की गई है। साथ ही अनुसूचित वर्ग के लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी, एजेंसी के विरुद्ध जरुरत होने पर जांच कराते हुए कार्रवाई कराने की मांग की गई है।

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