March 2, 2021

(पूरी हकीकत)

लापरवाही : सरकारी अस्पतालों में बच्चों के लिए भेज दी अमानक दवा, अब वापस मंगा कर कर रहे लीपापोती

न्यूज सर्च रायपुर- छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कार्पोरेशन (CGMC) की लापरवाही का एक मामला सामने आया है। यहां जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही से बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया गया है। आपको बता दें कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में बीमार बच्चों के इलाज के लिए सीजीएमएससी से भेजी गई अमानक अमोक्सिसिलीन ओरल सस्पेंशन दवा दी जा रही और किसी पता नहीं चला।

सीजीएमएससी ने इस सीरप की सप्लाई जून से पहले सभी अस्पतालों में की थी। अब लगभग आठ महीने बाद जब सीजीएमएससी को अपनी भूल का अहसास हुआ तो उसने चार दिन पहले बैच नंबर एमएपी 9014 वाले इस दवा को सभी अस्पतालों व सीएमएचओ से वापस मंगाने पत्र लिखा है। पत्र मिलने के बाद जब दवा को वापस भेजने की कार्यवाही शुरू की गई तो पता चला कि अस्पतालों में इस दवा की ज्यादातर मात्रा बीमार बच्चों के इलाज में खपत हो गई है। अंबिकापुर मेडिकल काॅलेज अस्पताल में तो इस बैच की 70 फीसदी से ज्यादा दवा बीमार बच्चों पर इस्तेमाल हो चुकी है। यह दवा एंटीबायोटिक है और सर्दी, खांसी, बुखार में डाॅक्टरों द्वारा एडवाइस की जाती है।

पूरा मामला सामने आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। अस्पतालों से इस दवा की एक-एक डोज खंगालकर एकत्र की जा रही है। इस घटना के बाद से सीजीएमएसी की दवा सप्लाई के सिस्टम पर सवाल खड़े होने लगे हैं। अधिकारी इस दवा की कुल मात्रा और क्वालिटी टेस्ट से पहले अस्पतालों में इस्तेमाल करने सप्लाई कर दिए जाने के सवाल के जवाब से बच रहे हैं।

क्वालिटी टेस्ट के बाद अस्पतालों तक इस तरह पहुंचती है दवा

सीजीएमएससी द्वारा सरकारी अस्पतालों में दवा की सप्लाई से पहले क्वालिटी टेस्ट किया जाता है। जो दवा एनएसक्यू (नान स्टैंडर क्वालिटी) श्रेणी में आती है, उस बैच की दवा रोक दी जाती है। इसके बाद स्टेट कार्यालय से सीजीएमएससी के संभाग स्तर के गोदाम में दवा भेजी जाती है। यहां से अस्पतालों में सप्लाई होती है। कभी-कभी सीधे स्टेट कार्यालय से अस्पतालों को दवा भेजी जाती है।

एक अस्पताल में 4 सौ पीस से ज्यादा हो चुकी है इस्तेमाल

सीजीएमएससी से मेडिकल काॅलेज अस्पताल अंबिकापुर में अप्रैल 2020 में एमएपी 9014 बैच की अमोक्सिसिलीन ओरल सस्पेंशन दवा 600 पीस भेजी गई थी। दवा के अमानक होने से सीजीएमएसी से चार दिन पहले दवा वापस करने पत्र आया तो यहां सिर्फ 158 पीस दवा बची थी। बाकी की 442 पीस दवा डाॅक्टरों की एडवाइज पर रोगियों के इलाज में इस्तेमाल हो चुकी है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बैच की दवा बाकी अस्पतालों में कितनी मात्रा में इस्तेमाल हुई होंगी।

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